Tag: हास्य कविता

कोई  गोरी  ऐसी  मिले – डी के निवातिया

(ताटंक छंद आधारि) कोई  गोरी  ऐसी  मिले *** कोई  गोरी  ऐसी  मिले  जो, मेरे  दिल  की  रानी हो चतुर चपल चंचल हो चितवन, सुंदरता की नानी हो, देव लोक …

पल दो पल का नेता हूँ…………………….देवेश दीक्षित

मैं पल दो पल का नेता हूँपल दो पल मेरी गद्दी हैपल दो पल मेरी सत्ता हैपल दो पल मेरा बुढ़ापा है मैं पल दो पल का नेता हूँपल दो …

पहेली – धूप ठंडी कैसे हो सकती है – सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

ज़िन्दगी इतनी बड़ी पहेली न होती….गर कवि न होता….सीधा न सोचता न सोचने देता….अच्छी भली राहों को ऊबड़ खाबड़ कर देगा…साफ़ पगडंडियों पे कांटे उगा देगा…न जाने दिमाग कैसा …

बस एक दाल रोटी का सवाल है – शिशिर मधुकर

बच्चे से मैं प्रौढ़ हो गया जाना जीवन जंजाल है इंसानी फितरत में देखा बस एक दाल रोटी का सवाल है कोई भी चैनल खोलो तो बेमतलब के सुर …

गधों का मता…..सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

यह राजनीति भी कैसी राजनीति है….बिना सर पैर सरपट भागती है….मुद्दे सब पीछे छूट जाते हैं…जनता भौचक्की ताकती रह जाती है….इलेक्शन आते ही नेताओं के ज्ञान चक्षु खुल जाते …

गधेजी……सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

बचपन में हम गए एक मेले में….बन-ठन ठुम्मक ठुम्मक ठेले में….हर तरफ थी खूब चहल पहल…लोग भी थे बड़े रंग बिरंगे से…कोई लाल कोई पीला…..हम थे नीले में..हर तरह …

कलयुगी कृष्ण – शिशिर मधुकर

कल शाम टी वी देख बड़ा आनन्द आ रहा था मोर पंख धारी लालू सुत बाँसुरी बजा रहा थाकलयुगी कृष्ण का लगा अवतार फ़िर हुआ है विवेकी जनों को …

रक्षाबंधन का दिन – शिशिर मधुकर

रक्षाबंधन का दिन हैं और राखी बँधवाने जाना हैं बहन तक पहुँचने को मगर जामो से पार पाना हैं कितनी भी मुश्किलें आए हम भारत के वासी हैं इन्हीं …

जब से मेरी शादी हो गई है – शिशिर मधुकर

मितरो जब से मेरी शादी हो गई है बेमतलब की एक बर्बादी हो गई हैं सोचा था मौज मनाऊंगा जी भर के मगर मेरी शांति भी आधी हो गई …

बीबी के नाम पर हसना मना है

सच है यारों शादी के बाद अपना राज चलाती बीबी चाहो न चाहो सिर पर काटों का ताज सजाती बीबी जो बनते हैं बब्बर शेर उनको बंदर सा नचाती …

मनोविनोद ……

मनोविनोद …… सुना है जोडियाँ स्वर्ग मे बनती है, अगर यह वास्तविकता है तो…… वजिब है वहां भी हो घोटालो और रिश्वत का बोलबाला …। क्योकि——->>> हमने तो jयहां …

उन दिनों की “यादें”

काशी सर्व विद्या की राजधानी यहाँ पढ़ कर लोग बन जाते विद्वान् मै भी पढूँ काशी में, किसी ने दिया पिता जी को ऐसा ज्ञान।। पिता जी के अरमानों …

झगड़ा शुरू हो गया

एक दिन कोई फिल्म, देख रहा था टीवी पर। अचानक ध्यान गया घर में घुसती बीबी पर।। अभी अभी वो चली आ रही थी बाजार से। क्या देख रहे …

दीपक बुझाने गये है

बचपन मे एक बार मै पहुचा दिल्ली अपने सगे चाचा के पास। दुआ सलाम हुआ हमारे बीच पर मैने पाया उन्हे गम्भीर उदास।। शादी के दस सालों मे एक …

जनसख्या वृद्धि और मेरा सुझाव

यूँही दर रहा जनसख्या वृद्धि का हम सब जल्द बेघर हो जायेंगे जब सोने को जगह नहीं मिलेगा तब खड़े खड़े हनीमून मनाएंगे गरीबी भुखमरी व बेकारी का जनसख्या …