Tag: कुन्डली

फँस रही है बेदाव में, दाव बिना लाचार

फँस रही है बेदाव में, दाव बिना लाचार । पाँचों पँजों में पड़ी, आठों आठों सार ।। आठों आठों सार दाव देता ना फाँसा । बाजी बीती जय फुसे …

पापी के कोई भूलकर, मत ना बसो पडौस

पापी के कोई भूलकर, मत ना बसो पडौस । नीच जनों के संग में, निर्दोषी गहें दोस ।। निर्दोषी गहें दोस, दोस देते दुःख भारी । बिगड़ जाय दो …

तोड़े जाल अनादि ये भरम, भये दुःख दूर

तोड़े जाल अनादि ये भरम, भये दुःख दूर । दया करी गुरुदेव ने दिये ज्ञान भरपूर ।। दिए ज्ञान भरपूर पुण्य अरु पाप लखाये । गंगादास परकास भय दुई …

तेरे बैरी तुझी में, हैं ये तेरे फ़ैल

तेरे बैरी तुझी में, हैं ये तेरे फ़ैल । फ़ैल नहीं तो सिद्ध है, निर्मल में क्या मैल ।। निर्मल में क्या मैल, मैल बिन पाप कहाँ है ? बिना पाप …

चेले चातुर करें क्या, जो गुरु हों मतिमन्द

चेले चातुर करें क्या, जो गुरु हों मतिमन्द । आप फंसे मोह जाल में, ओ क्या काटें फ़न्द ।। ओ क्या काटें फ़न्द फँसे माया में डोलें । बँधे …

चारों चारों युगों से, सुखदायक हैं चार

चारों चारों युगों से, सुखदायक हैं चार । दया, सत्य, अरु संत ये, चौथा पर उपकार ।। चौथा पर उपकार चार साधन सुखदाई । जो ये धन ले साध …

गाओ जो कुछ वेद ने गाया, गाना सार

गाओ जो कुछ वेद ने गाया, गाना सार । जिसे ब्रह्म आगम कहें, सो सागर आधार ।। सो सागर आधार लहर परपंच पिछानो । फेन बुदबुद नाम जुड़े होने …

ऐ अविनाशी ! आपका, जन्म नहीं, ना नास

ऐ अविनाशी ! आपका, जन्म नहीं, ना नास । सदा एक निर्भय अचल, भगवत सर्व-निवास ।। भगवत सर्व-निवास विषय बानी ना मन के । नर तन धारण करो हेत हरि …

अन्तर नहीं भगवान में, राम कहो चाहे संत

अन्तर नहीं भगवान में, राम कहो चाहे संत । एक अंग तन संग में, रहे अनादि अनंत ।। रहे अनादि अनंत, सिद्ध गुरु साधक चेले । तब हो गया …

कुन्डली

अन्ना ने जब से लिया, अनसन का आधार राजनीत में चढ गया, ऐसा पारावार ऐसा पारावार, नित नये हुए बखेङे सबके अपने राग, गर्क जनता के बेङे नीरज करो विचार, …