Tag: जीवन दर्शन

वो आईना लेके मुस्कुराते रहे।

वो लेके आइना मुस्कुराते रहें हवाओं में थे एहसास सो आते जाते रहें आईने से ही न जाने क्यों इतना शरमाते रहें हर राज दिखा कर भी छिपाते रहें …

हो सके न तुम न हम तुम्हारे हुए ।

मेरे मरनेपर भी क्या नजारे होंगे कोई गम तो तो किसी ने आंसू नकली सावरे होंगे किसी की बातों के फव्वारे होंगे थोड़े सामने तो कई किनारे होंगे, हो …

चलेगा दिल ये जहाँ तक जमाना चलेगा ।

तू जियेगा जहाँ तक जमाना होगा, फिर से कोई अफसाना होगा, मिलने का नया बहाना होगा, फिर से कोई दीवाना होगा। इन्ही गलियों मे फिरेगा, डुपट्टा किसी का तुझ …

पवन – डी० के० निवातिया

हे पवन !तू है बड़ी चंचल री,छेड़ जाती है,अधखिले पुष्पों को…!है जो चिरनिंद्रा में लीन,सुस्ताते हुए डाल पर,तेरे गुजरने के बादविचलित हो उठते है,नंन्हे शिशु की मानिंदतरस उठते है,जैसे …

शिव मृतुन्जय हर जन हो सुखाई…सी.एम्.शर्मा…

शिव भोले बाबा, शिव शम्भू हमारे…शिव चरणों में सब बंधू सखा रे….शिव महिमा गुणगान करे हम…शिव सुत हम शिव पिता हमारे….शिव नाद गूंजे है ब्रह्माण्ड ये सारे…शिव नर्तन कण …

यह जीव -हत्या क्यों और कब तक ! (कविता )

यह बेजुबान जानवर,यह भोले जानवर ,इंसान की नियत से बेखबर ,यह मासूम जानवर .घर पर तो लाते हैं,बड़ा प्यार-दुलार देते हैं,लेकिन जब निकल जाये मतलब,तो सड़कों पर भटकने/मरने को …

उलझी है ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

भागती सी ज़िन्दगी में जल्दी पाने की होड़ मची,खुद की खुदी के लिए लोग रोंदते औरो की ख़ुशी|फ़ुर्सत नहीं किसी के पास हर इंसान थका सा,ज़िन्दगी में अपनी बढ़ती …

ज़िन्दगी से शिकायत कैसी – अनु महेश्वरी

दर्द देती है, फिकी है कभी,फिर हसना भी सीखा रही,ज़िन्दगी से शिकायत कैसी,वह तो जीना ही सीखा रही|जुदाई है, गम देती है कभी,पर हर पल साथ निभा रही,ज़िन्दगी से …

अपनी हंसी को भुल – अनु महेश्वरी 

कुछ बन जाने की चाहत, मन में लिए,अपनों से कितनी दूर निकल जाते है, लोग,वक़्त के हाथो कैद, बिना रुके बस चलते रहते,कभी कभी खुद को भी भुला, सपने …

31 जुलाई और दो सितारे (प्रेमचन्द, रफ़ी पर विशेष)

लेख शुरू करने से पूर्व मैं पाठकों को दो चित्रों से अवगत करना चाहूंगा:—पहला चित्र:— “प्रेमचंद” की शवयात्रा गुज़र रही थी। तब सामने से गुज़रते किसी अपरिचित व्यक्ति ने …

काल के कपाल पर दर्ज़ रहेंगे बी मोहन नेगी के चित्र

हमें बहुत प्यारे लगते हैं / वीर बाँकुरे गढ़वाली / सीमा पर, अपलक जगते हैं / वीर बाँकुरे गढ़वाली / मातृभूमि का चप्पा-चप्पा / इनके शोणित से संचित / …

काश, ऐसे भारत का निर्माण अब हकीकत हो – अनु महेश्वरी

हर इंसान बने, अब अच्छा,नाता जोड़े, लोगो से सच्चा,छल कपट और दुर्भावना का यहाँ न कोई स्थान न हो,देश तोड़ने वालो का इस जहाँ में अब न कोई मान …

शब्द विवेचन- मेरा आईना- प्रेम

शब्द विवेचन – “प्रेम”   शब्द माला के “प” वर्ग के प्रथम और व्यंजन माला के इक्कीस वे अक्षर के साथ स्वर संयोजन के बना “अढाई अक्षर” का शब्द …

रिश्तों का तानाबाना – अनु महेश्वरी

बचपन से बुढ़ापे तक के सफर में,रिश्तों का तानाबाना बुनते बुनते,हम एक जाल सा बुन तो लेते है,पर ज़िन्दगी के अंतिम पड़ाव में,कुछ, साथ छोड़ चुके होते,कुछ, साथ रहना …

मीठे बोल का अभ्यास करे – अनु महेश्वरी

कुरेदे न, ज़ख्म, किसी के कभी,कर सके तो, गम भूलने में, मदद करे|आंसु दे न, आखों में, किसी के कभी,भर सके तो, खुशियाँ औरो के, जीवन में भरे|घाव दे …

मैं सैनिक हूँ

मैं सैनिक हूँमैं जगता हूँ रातभरचौकस निगाहें गड़ाए हुएउस जगह जहाँ अगली सुबह देख पाऊंइसमे भी संशय हैउसके लिए जो अभी अभीछाती से लगाके सोई है मासूम बच्चे कोमैं …