Tag: माँ पर कविता

कुण्डलिया छंद – डी के निवातिया

कुण्डलिया छंद *** मात  दात्री जन्म की , पिता जीव आधार। धरा  गगन के  मेल से, अदभुत  ये संसार।। अदभुत ये संसार, गजब कुदरत की माया। पल में बदले …

माँ – डी के निवातिया

।। माँ ।। मोतियों सा भरा समंदर,लहरों सी उतार-चढ़ाव, माँ, उम्मीदों से भरा शहर जैसे,कोई ठहरी झील सी गाँव, माँ, शुभकामनाओं की लड़ी,आशीषों की बड़ी छाँव, माँ, सूरज माथे …

रोता हुआ हमको छोड़ गई – डी के निवातिया

रोता हुआ हमको छोड़ गई! तन-मन से हमको तोड़ गईरोता हुआ हमको छोड़ गई किस बात की मिली सज़ाक्यों हम से तुम मुख मोड़ गई बैठी रहती थी तू …

माँ क्या होती है – डी के निवातिया

माँ क्या होती हैकिसी ने पूछा मुझसे माँ क्या होती हैमैंने कहा मुझे पता नहीं क्या होती हैजो मैंने जाना और समझा है अब तकअगर समझ सके तो सुन …

माँ – डी के निवातिया

 “माँ” किसी भी हाल में, हर पल खुशी देती है माँ,अपनी ज़िंदगी से सबको जीवन देती है माँ,भगवान से पहले, माँ की पूजा करो जनाब,क्योंकी भगवानों को भी जन्म …

“माँ”…इंतज़ार… सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

  जिन नैनों से देखा तुमने आज उनमे रही ज्योत नहीं…जिन बाहों ने संभाला तुझको बची उनमें ताकत नहीं…ममता का समंदर छलकता अब भी पहले जैसा है….पर उसको पाने की …

“माँ”…सी. एम् शर्मा (बब्बू)

 धागे प्रेम के….कच्चे कहाँ होते हैं…देखो ‘माँ’ ड्योढ़ी पे है खड़ी…अकेली….भूखी…प्यासी….स्थिर काया…एकटुक निहारती…वीरान सी पगडण्डी लगती है उसे…भीड़ इतनी आती जाती में भी…बेखबर दुनियाँ सारी से…ड्योढ़ी पे है खड़ी….अंतर्मन …

तुमने मुझको छांटा था-शिशिर मधुकर

बचपन में ना जाने मुझको कितना तुमने डांटा था गलती मैं जब करता था गालों पर पड़ता चांटा था सबने पूछा जब तुमसे चुन लो एक सुन्दर सा बच्चाहाथ …

माँ की गोद बिछौना- शिशिर मधुकर

हर बच्चा अपनी माता की आँखों का नूर सलौना है उसके प्रेम के आगे जग का हर स्नेह कितना बौना हैकैसी भी पीड़ा हो लेकिन नींद जहाँ आ सकती …

माता का दिल – शिशिर मधुकर

रूठ के तुम से लड़ा मैं जब भी जाने क्या क्या कह डालालेकिन तुमने दूर ना खींचा मुझसे निज ममता का प्यालासब धोखा दे सकते हैं जग में जान …

नूर हूँ मै – डी के निवातिया

नूर हूँ मै @ तेरे मुखमंडल की आभा सेप्रज्वलित होता दीप हूँ मैंतेरे ही आशीर्वचनो सेफलीभूत होता आशीष हूँ मैतुम कारक, कारण तुम हीतुम से उपजा बीज हूँ मैतेरी …

स्वेटर माँ के हाथ का – डी के निवातिया

स्वेटर माँ के हाथ का — सर्दी से बचने के लिए,आज लबादों से लदा हूँ, महंगे सूट पहनकर !मगर वो गर्माहट नहीं मिलती,जो माँ के हाथ से बने स्वेटर …

माता रानी के द्वार — डी के निवातिया

“माता रानी के द्वार” *** हुम्म्म्मम्म्म्म…………..चलो ..चलो ………….!चलो ..चलो ……………..चलो ..चलो ………….! चलो ..चलो ……………चलो ..चलो ………….!हुम्म्म्मम्म्म्म…………..चलो ..चलो ………..! चलो रे चलो माता रानी के द्वार दुःख हरती, करती …

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँदबी हुई पहचान नहीं हूँमै स्वाभिमान से जीती हूँरखती अंदर ख़ुद्दारी हूँमै आधुनिक नारी हूँपुरुष प्रधान जगत में मैंनेअपना लोहा मनवायाजो काम मर्द करते आयेहर …

माँ से प्यारा…… सुख सारा है |गीत| “मनोज कुमार”

माँ से प्यारा इस जग में ना, हमको कोई प्यारा हैमाँ की सेवा कर लो, इसके चरणों में सुख सारा है माँ से प्यारा……………………………. सुख सारा हैये रिश्ता है …

मातृ दिवस — माँ पर कविता — डी. के निवातिया

माफ़ कर देना माँ तुझे मातृ दिवस पर याद नहीं किया मैंने शायद गुम गया कही मातृ दिवस तेरे निश्छल प्रेम की ओट में हर क्षण जो छायी रहती …

अम्मा(people chief minister)

दिनभर रोती आँखे पलक झपकाने से, कतराती रही कही अनहोनी ना हो जाये ख़बर मिलीं………..तो आसं लगाये बैठी….शायद अभी….शायद अभी….शायद अभी तो अम्मा ऊठ जाये,ऊठ कर इतना ही बोल …

बचपन (विवेक बिजनोरी)

” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है,कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है”माँ का अपने हाथों से रोटी खिलाना भूख में,पापा की वो सारी …