Tag: कविता

तुम बहुत याद आते हो – डी के निवातिया

तुम बहुत याद आते हो, तुम बहुत याद आते हो,क्यों इतना सताते हो जीने देते,न मरने देते हो क्यो इतना रुलाते !! जब से तुम चले गए दुनिया हमसे …

मदारी या फ़रेबी – डी के निवातिया

मदारी या फ़रेबी *** मदारी हर दफ़ा कोई नया खेला रचाता है फँसाकर जाल में अपने हमें बुद्धू बनाता है सुई की छेद में हाथी घुसाता है सुना हूँ …

कोई  गोरी  ऐसी  मिले – डी के निवातिया

(ताटंक छंद आधारि) कोई  गोरी  ऐसी  मिले *** कोई  गोरी  ऐसी  मिले  जो, मेरे  दिल  की  रानी हो चतुर चपल चंचल हो चितवन, सुंदरता की नानी हो, देव लोक …

अगर कीचड़ में खिला हूँ तो क्या है

दो बातें तो करलो, मन को परखलो, मन शुद्ध, तन मैला तो क्या है, कमल हूँ कमल सा दिल है मेरा, अगर कीचड़ में खिला हूँ तो क्या है । आसमां को मैं …

मातृभूमि का श्रृंगार करो – डी के निवातिया

आज़ादी के पावन दिन पर, मातृभूमि का श्रृंगार करो देश ध्वजा का संदेश यहीं, वैर  भाव का संहार करो।। जो मिट गए, जो खो गए, हाथ थाम तिरंगा सो …

हुई महंगी मुबारकबाद -डी के निवातिया

हुई महंगी मुबारकबाद *** हुई महंगी बहुत ही मुबारकबाद, के सोच समझ कर दिया करो, देना हो जरूरी,तो रखना हिसाब, हर घड़ी हर शख्स को न दिया करो..!! कुछ …

आदमी है, खाता है – डी के निवातिया

आदमी है, खाता है, *********** आदमी है, खाता है, खाकर भी गुर्राता है, करता है खूब चोरी साथ में सीना जोरी कर के गर्व से चौड़ी छाती लाल पीली …

रिश्ते – डी के निवातिया

रिश्ते *** *** रिश्ते वही मगर, रिश्तो में रिश्तो की वो बात नहीं है, सम्बन्ध वही, मगर सम्बन्धो में ज़ज्बात नहीं है, घर में बैठे, चार प्राणी अपनी गर्दन …

तू कैसा प्रेमी है – डी के निवातिया

तू कैसा प्रेमी है !! *** देता है न माँगता सोता न जागता न रोता न हँसता भागता न थकता देखता न तकता, बोलता न बकता, सभी को लगता …

कैसा ये सावन आया – डी के निवातिया

  कैसा ये सावन आया, मुझको अबकी ना भाया, बारिश की इन बूंदों ने जी भर मुझको तड़पाया ।। बागों में कोयल बोले, कानो में मिश्री घोले, अमवा की …

सावन – डी के निवातिया

सावन *** *** *** सिंधु उर से उठ चले, भरकर अंजुरी जलधर, पवन वेग संग थे बढे, सलिल गागर उर धर !! असंतुलित आकार लिए गगन गाँव चले अंबुधर, …

सरकारें – डी के निवातिया

सरकारें ! सरकारों में पंगे है या पंगो की सरकारें है सरकारों में गुंडे है या गुंडों की सरकारें है हकीकत से हमेशा मुहँ छुपाते है ये लोग, सरकारों …

दे देना हमको माफ़ी – डी के निवातिया

मैं पतझड़ की पाती, तुम हो उपवन का फूल ! दे देना हमको माफ़ी, जो हो जाए हमसे भूल !! मै गाँव का देशी छोरा तुम ठहरी शहरी मेम, …

चमक कम न हो – डी के निवातिया

चमक कम न हो *** चाँद से रोशन चेहरे की चमक कम न हो, झील सी गहरी ये आँखे कभी नम न हो, बहारों की फिज़ाओ में दमकता ये …

कुण्डलिया छंद – डी के निवातिया

कुण्डलिया छंद *** मात  दात्री जन्म की , पिता जीव आधार। धरा  गगन के  मेल से, अदभुत  ये संसार।। अदभुत ये संसार, गजब कुदरत की माया। पल में बदले …

भारत की महिमा

भारत एक सूरज जो जलकर दे दुनिया को प्रकाश।भारत एक दार्शनिक जो पर्यटकों को मन वैहलाये ।भारत एक गुरु जो दे दूसरों को शिक्षा।भारत एक वृक्ष जो दे दूसरों …

सर्जिकल स्ट्राइक

रौद्र रूप देख थर्रायी है,धरती पाकिस्तान की । कफ़न बाँध कर रण में उतरी,मिट्टी हिन्दुस्तान की । छेड़ रहे थे सिंहों को,थी चर्चा स्वाभिमान की । बालाकोट में गरज …

राणा का शौर्य

अकबर  हुआ   दुलारों   में । हैं  राणा  खड़े   क़तारों  में । हम   पढ़ते  हैं  बाज़ारों  में । कुछ बिके हुए अख़बारों में । ये जाहिल हमें सिखाते हैं । …

पप्पू मेरा पास हुआ

कांग्रेस  मुख्यालय  गूंजा ,  श्री राम  के  नारों  से । अब बोलेंगी देखो मैडम,सुबह सुबह अख़बारों से । बड़े  दिनों से  जुगनू  हमने देखे ना  अँधियारों में । मोदी …

कोरोना की मार

वो शहर सुनी सी हो गया हैंजिसमें लोग तारें की तरह जगमगाते थेंवो गलियां जहां से लोग निकलते थेंकुत्ते की आवाज़ भी अब सुनाई नहीं देती हैंअब कुत्ते भी …