Tag: जिंदगी पर कविता

मैं क्या हूँ ? { श्रमिक वर्ग की वेदना }

दिखने में तो इंसान हूँ ,मगर क्या वास्तव में इंसान हूँ ?न दिल अपना ,न दिमाग अपना ,जो जिधर कहे वहीं चला जाता हूँ ।कभी गाँव से शहर की …

और कितनी चाहिए तुम्हें आज़ादी ? (कविता)

आज़ादी ! आज़ादी !आज़ादी !,बस रट लगा रखी है ‘आज़ादी ‘।इस लफ्ज की गहराई जानते हो ?आखिर क्या है यह आज़ादी ?ऊंची सोच और विशाल ह्रदय ,सयमित जीवन है …

इतिहास उसी का पूजेगा

इतिहास उसी को पूजेगाजो सबसे जा कर नही पूछेगाजो ठान लिया अपने मन मेउस लछ्य मे खुद को सीचेंगाइतिहास…………जो हार से न डर जाता होजो थोड़े मे न घबराता …

उलझा हुआ वो भी – अनु महेश्वरि

पुरुष शक्तिशाली या नारी,कोन किसपे परे है भारी,ये बहस तो चलती आयी है,सदियों तक चलती भी रहेगी।मेरा अनुभव तो कहता है,पुरुष भी मन से कोमल होते,अपने हर रिश्ते को …

हम तुम्हे भुला न पाए …… (ग़ज़ल ) { अमर गायक स्व.मुहम्मद रफ़ी साहब की याद में }

कितने ही ज़माने गुज़र गए ,मगर हम तुम्हें ना भुला पाए.तेरी तस्वीर पर सजदा किया,तेरी याद में दो अश्क बहाए.तेरे गीतों को जब सूना तो,कई मंज़र आखों के रूबरू …

रिश्तों के मायने – अनु महेश्वरी

  रिश्तों के मायने जो समझ गया,जीवन जीना उसे रास आ गया।साथ जो मिले अपनो का यहाँ,बदला मौसम भी देखो भा गया।अनजान था सबसे महफ़िल में,मीठे दो बोल से वह …

भूख – डी के निवातिया

भूख *** ये भूख जाने कैसी है, मिटती नहींतन-मन को तृप्ति, मिलती नहींजो जितना अधिक पा जाता हैचाहत फिर दोगुना बढ़ जाता हैकोई दो जून भरपेट को तरसता हैकही …

ज़िन्दगी से शिकायत कैसी – अनु महेश्वरी

दर्द देती है, फिकी है कभी,फिर हसना भी सीखा रही,ज़िन्दगी से शिकायत कैसी,वह तो जीना ही सीखा रही|जुदाई है, गम देती है कभी,पर हर पल साथ निभा रही,ज़िन्दगी से …

एक की ख़ामोशी भी खलती है – अनु महेश्वरी

गलत या सही मापने का कोई पैमाना नहीं,पर मुश्किल होती, जब सिमित रख दायरा,अपनी समझ को ही, सब बस माने है सही।सब कुछ अपने हिसाब से हो यह जरुरी …

एक दौड़ है जिंदगी – डी के निवातिया

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по …

खुद को समझे है ज्ञानी सब – अनु महेश्वरी

घर भरा रहता था, रिश्तेदारों से कभी,समय के साथ बदले मायने, दूर है सभी।लगे है भूलने रिश्तो की मर्यादा सब,निभाने की इन्हें फुर्सत भला कहाँ अब?अखरने लगा बड़ो का …

वक़्त – अनु महेश्वरी

गुरुर किस बात का करते हो तुम,गुरुर किस बात का करते हो तुम,आज अगर हो मिट्टी के ऊपर तो,कल हो जाओगे मिट्टी में विलीन|वक़्त निकाल, अपनों से करो बाते …

नहीं हो तुम कमज़ोर – अनु महेश्वरी

 रोज़ हो रहा चीरहरण,पर बचाने, कोन है आएगा?उठो, बनो वीरांगना, खुद को ही सम्भलना होगा,मूक बने इस समाज में खुद को ही बचाना होगा|इस समाज से क्या उम्मीदें रखनी,जो …

इंसानी फितरत — डी के निवातिया

इंसानी फितरत @ अपने पराये के फेर में दुनिया रहती हैइंसानी फितरत है ये मेरी माँ कहती हैहर दुःख दर्द का इलाज़ है आत्ममंथनकहने को भावो में तो दुनिया …

रुआना आ गया – डी के निवातिया

रुआना आ गया ! कागज़, कलम, दवात, डायरी के पन्ने,ये सब तो अब बीते ज़माने कि बाते हैव्हाट्सप्प, ट्वीटर, फेसबुक, भी छोडोवीडियो कॉलिंग का ज़माना आ गया ! कुछ …

कुछ लम्हें – कुछ पल – सोनू सहगम

-: कुछ लम्हें –कुछ पल :-उसने धीरे से बेड से उठते हुएफुसफुसाकर कहा मेरे कान मेंक्या तुमको वो लम्हा याद है,जब हम मिले थे पहली बार अनवर चाचा की …

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँदबी हुई पहचान नहीं हूँमै स्वाभिमान से जीती हूँरखती अंदर ख़ुद्दारी हूँमै आधुनिक नारी हूँपुरुष प्रधान जगत में मैंनेअपना लोहा मनवायाजो काम मर्द करते आयेहर …

प्रद्युम्न-श्रद्धांजलि

बड़े प्यार से स्कूल भेजा, माँ ने अपना दुलारा lनहीं जानती थी, नहीं अब वो आएगा दुबारा llबेफिक्र थी ये सोचकर वो स्कूल पहुंच चुका है lनहीं पता था …

रक्षा बंधन पे, दे दें यह उपहार, – अनु महेश्वरी

कोन तय करेगा हद क्या है,मेरे,चलने की,खाने की,बोलने की,हँसने की,घूमने की,कपड़ो की,मैं या मेरे अपने या यह समाज,क्यों हम इतना सोचते हमेशा,लोग क्या कहेंगे,या फिर, समाज क्या कहेगा?कोन है …