Tag: Hindi poem

जीवन साथी

मेरी अनकही अमानत, मेरी इकलौती इबादत,मेरी ज़रूरत, तु ही तो है मेरी ज़िंदगी,ज़ख़्मों का मरहम, मेरा नादान बचपन,मेरी हँसी, तु ही तो है मेरी अमादगी । मेरी पहली उम्मीद, मेरा …

जुआरी दांव पर खुद को लगाने आज बैठा है…

हार कर घर बार सारा सुख, पाने आज बैठा है,जुआरी दांव पर खुद को लगाने आज बैठा है।नहीं बाकी रही कीमत तेरी, तेरी ही नज़रों में,जो रख कर हासिये …

शरद पूर्णिमा – सोनू सहगम

-: शरद पूर्णिमा :-आज पूर्ण चन्द्रमा, सोलह कलाओं से युक्तधरती पर अपनी, अमृत बरसाने आया हैधरा के समीप होगा, दमकते चाँद काये सुंदर संजोग, शरद पूर्णिमा कहलाया हैश्री, भू, …

इक्कीसवी सदी -कचरे में रोटी ढूंढते हाथ – अनु महेश्वरी

कचरे से रोटी उठाते बच्चे को देख,मेरी आँखें शर्म से झुक गई।उसने जब मेरी ओर देखा,मैं उससे नज़रें मिला न सकी।पास की दुकान से,बिस्कुट खरीद बच्चे को दे,लौटते वक्त …

साधन से ज़्यादा साथ ज़रुरी – अनु महेश्वरी

न शिकवा करें,न शिकायत करें,साधन से ज़्यादा साथ ज़रुरी होता है।न कभी रूठे रहें,न खामोश रहें,बातों से अपनी खुशहाल ये ज़िंदगी है।खुद का प्रकाश खुद बने,जैसा आए पल जिया …