Tag: प्रेम कवितायें

शह प्यार की – शिशिर मधुकर

मुहब्बत है अगर असली तन से खुशबू सी आती है कोई नस नस में बहता है बिखर फिर ये जताती है मुहब्बत है मुझे उससे समझना है नहीं मुश्किल …

नशा – शिशिर मधुकर

मुझको नशा अपना दे के तुम दूर क्यों हो गए हो काटें ये तन्हाइयों के जीवन में क्यों बो गए होनींदें उजाड़ी हैं मेरी दर्द ए मुहब्बत जगा के …

पत्थर – शिशिर मधुकर

अनोखी हर अदा तेरी तुझे कैसे बताऊं मैं तेरी तस्वीर सीने से बता कैसे हटाऊं मैं भले तू बन गई पत्थर मेरे अब पास ना आए इबारत तेरी यादों …

जादूगरी – शिशिर मधुकर

देखो जहां भी नुमाया कुदरत की जादूगरी है हुस्न मेरी जाना तुम्हारा शफ्फाक और मरमरी है यूं ही नहीं रूप तेरा दुनिया को प्यारा लगे सुन अल्लाह की ये …

मत हो परेशां – शिशिर मधुकर

भूलेंगे तुझको कभी ना वादा है इस बात का सुन फिर से मैं तुझपे उगूंगा बोल शाखा को ये पात का सुन नींदें लगेंगी तभी तो ख्वाबों में कोई …

साथ ऐसा मुक़द्दस – शिशिर मधुकर

अधूरी प्यास ने मुझको सदा भीतर से तोड़ा है वो ही अच्छा लगे है प्यार जो दे देता थोड़ा है मुहब्बत जिसने दी मुझको उसे अपना खुदा माना साथ …

दौर इक वो भी था – शिशिर मधुकर

घाव सूखा नहीं अब तक बना जो तेरे जाने से मगर क्या फायदा तुझको पीर अपनी बताने से आज फिर से कुरेदा दिल के मेरे राज को उसने उभर …

तेरी खुशबू तो महके है – शिशिर मधुकर

नशा तुझसे मुहब्बत का हर घड़ी हम तो करते हैं जाम में डूब के ही दर्द सब दिल के उतरते हैं भले होती हो रुस्वाई मगर ना डर कोई …

रिश्ता – शिशिर मधुकर

ये रिश्ता बन गया ना तोड़ना अब हाथ है मेरे तेरी खुशबू मेरी सांसों में घुल के साथ है मेरे नहीं मुझको पता औरों ने तुझको क्या जगह बख्शी …

कुदरत से क्या लड़ूं – शिशिर मधुकर

दिल की ये आरजू है कोई संग में चले मेरे बन के स्वप्न अंखियों में कोई हरदम पले मेरे देखो मैं ढूंढता हूं किसी बिछड़ी सी रूह को कब …

फूल का सा मन – शिशिर मधुकर

तुमको तलाशते रहे तुम ना मिले मुझे हरदम रहेंगे जान लो कुछ तो गिले मुझे सब कुछ लुटा दिया फकत इक बोल पे तेरे मिल जाते काश इसके एवज …

अजीजा – शिशिर मधुकर

ख्याल मेरा अगर दिल में तेरे रहता समाया है मुहब्बत तुझको दे दे के मकाम ये मैंने पाया है असर तेरी मुहब्बत का भी कुछ कमतर नहीं मुझपे तेरी …

हैरानी – शिशिर मधुकर

कैसी ये मुहब्बत है कैसी ये जवानी हैमन ही मन में तुमको जब बात छुपानी हैहै हुस्न बना भोला और इश्क हुआ तनहाउलफत की तो सदियों से बस ये …

फरियाद नहीं करते – शिशिर मधुकर

कैसी ये मुहब्बत है तुम याद नहीं करते वीरान से सहरा को आबाद नहीं करते जिस घर को जोड़ा था जां दे कर के अपनीखुद के हाथों उसको बरबाद …

नजरअंदाज – शिशिर मधुकर

मुझे मालूम है मैं दिल पे तेरे राज करती हूंतेरी नाराजगी तब ही नजरअंदाज करती हूंतू रूठा भी रहे मुझको तो केवल प्यार मिलता हैतेरे संग मिल के मैं …