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एक दिन मादर-ए शिकम में

मादर-ए शिकम में –1–एक दिन मादर-ए शिकम मेंपल रहे कतरे के जेहन में कुछ-कुछ बातें आईंचाहत उमड़ीं उसके मन मेंअपने रब से जताईं-‘आज अतल में पड़ा हुआ जब धरती …

मानव सब मेरे ही अपने

मानवजग में जितने हैंसब मेरे ही अपने हैं;सोच भले हो अलग-अलग सबके अपने काम-काज़ हैंसबके अपने सपने हैं।काफिर या मुनाफिक किसी को क्यों कह दूं मैं,ये बात भला कैसे …

ये मतवाला संसार

जाने किस दर्द-दंश से रोष दिखाता है समीर अंग-अंग को कम्पित करता तन में पहुंचाता है पीर.चौंक कर गिरते पीले पल्लव कलियों को देता झकझोर नीड़ के अन्दर उधम …

बच्चे चाचा उन्हें बुलाते

इलाहाबाद में जन्म हुआ था थे कश्मीरी ब्राम्हण परिवार पिता मोतीलाल थे उनके स्वरुप रानी से मिला संस्कार.समय की गति के साथ-साथबने यशस्वी और गुणवान स्वाधीनता संग्राम के योद्धा …

श्रद्धा की अभिव्यक्ति है

आश्विन मास के कृष्ण-पक्ष में आरम्भ महालय का होता है पितरों को नमन करने का अनुपम अवसर ये होता है. जिनकी कृपा से तन-मन मिलता कृतज्ञ ये सारा जीवन …