Tag: गीत

जुदा हो जाऊँगा – डी के निवातिया

जुदा हो जाऊँगा *** कोई रोकना चाहेगा लाख फिर भी जुदा हो जाऊँगा लगाकर गले मौत को,  जिंदगी से ख़फ़ा हो जाऊँगा !! चाहकर भी कुछ न कर पायेगा …

औकात दिखा दी – डी के निवातिया

औकात दिखा दी *** इक बीमारी ने इंसानों को उनकी औकात दिखा दी, इंसान के भेष में छुपे हुए हैवानों की जात दिखा दी ! कोई रोता अपनो को …

तेरी भी खता है – डी के निवातिया

तेरी भी खता है *** ख़ुदा की रज़ा क्या है ये किसे पता है, किसी और को दोष देना बड़ी धता है! जो भी हुआ है सबक ले कुछ …

हमदर्द ढूंढते हो – डी के निवातिया

हमदर्द ढूंढते हो, दर्द के साये में रहते हो, और हमदर्द ढूंढते हो, बड़े नादाँ मरीज़ हो, खुद-ब-खुद मर्ज़ ढूंढते हो !! खुदगर्ज़ी की जीती जागती मिसाल हो आप, …

चल देता हूँ मैं – डी के निवातिया

चल देता हूँ मैं *** कुछ लिखता हूँ, और लिखकर चल देता हूँ मैं, क्रोध में भी मस्ती को भरकर चल देता हूँ मैं ! है पसंद मुझे, सब …

तुम बहुत याद आते हो – डी के निवातिया

तुम बहुत याद आते हो, तुम बहुत याद आते हो,क्यों इतना सताते हो जीने देते,न मरने देते हो क्यो इतना रुलाते !! जब से तुम चले गए दुनिया हमसे …

चिट्ठियां जो तुम्हे भेजनी थी वो खो गई

चिट्ठियां जो तुम्हे भेजनी थी वो खों गईं____मेरी पसंद ,मेरा इंतजार लिखा होता थाशब्दों के हेर फेर इजहार लिखा होता था।मैं पसंद ना आऊं तो मत कहना किसी सेइस …

कोरोना ग़ज़ल

विश्व अब चिंतित बहुत है आई संकट की घड़ी हैकष्ट भय चर्चित बहुत है आईं संकट की घड़ी हैयह महामारी बनी दुस्साध्य कोविड है चुनौतीसंक्रमण गर्हित बहुत है आई …

खुदाया माफ़ कर – सर्वजीत सिंह

खुदाया माफ़ कर सारे रस्ते बन्द हो गए बन्द हैं तेरे द्वार इस दुनिया को माफ़ कर महामारी से ना मारखुदाया माफ़ कर, खुदाया माफ़ कर, हम बच्चों को …

काली रात आयी है – डी के निवातिया

काली रात आयी है *** डोली में सजकर, माँ के घर, ये कैसी सौगात आई है, तिरंगे में लिपटे देखो, बाँके दूल्हों की बारात आई है।   एक बार …

तेरी नज़रो में – डी के निवातिया

विषय : लेखनविधा : ग़ज़ल /गीतिकाशीर्षक : तेरी नज़रो मेंतिथि : २६/०६/२०१९ *** तेरी नज़रो में मेरी कीमत रही कुछ ख़ास नही,इसलिए मैं आता तुम्हे अब ज़रा भी रास …

पर्यावरण दिवस – डी के निवातिया

पर्यावरण दिवस *** पेड़-पौधे काटकर बैनर, पोस्टर बना रहे है, संदेशो में जागरूकता अभियान चला रहे है । ! विलासिता पूर्ण जीवन जीने की चाहत में, हम प्राकृतिक सम्पदा …

गंवारा नहीं – डी के निवातिया

गंवारा नहीं *** जाज़िब आब-ए-आईना है हम, कोई आवारा नहीं,हुस्न करे नज़रअंदाज़ कोई ये हमको गंवारा नहीं । मिल गए है ख़ाक में हूर-ऐ-जन्नत जाने कितने,लेकर अपनी पनाहो में जिसे …

छुप-छुप के – डी के निवातिया

छुप-छुप के ***ये जो छुप-छुप के नज़रे मिलाई जा रही है,जरूर कोई नई साज़िश रचाई जा रही है !!ये इश्क का मसला भी सियासत सा लगे है,मिलकर गले प्रेम …

होली – डी के निवातिया

शीर्षक :- मैं होली कैसे खेलूँरचनाकार:- डी के निवातिया ! विषय : – होली कोई रंग न मोहे भाये, मोरा दिल चैन न पाएंमै होली कैसे खेलूँ, मोरे साजन …

आज की नारी – डी के निवातिया

आज की नारी *** घूँघट त्याग, नज़र से नज़र मिलाने लगी है,नारी शक्ति अपनी ताकत दिखाने लगी है !! घुट-घुट के जीना बीते दिनों की बात हुई,खुलकर जिंदगी का …

” गुलिस्ताँ ” (साहित्य की फुलवारी )

साहित्य प्रेमियों के लिए ख़ुशी की बात है की साहित्य समूह के कुछ सदस्यों ने एक साथ मिलकर एक पुस्तक ” गुलिस्ताँ ” (साहित्य की फुलवारी ) का सफल …

ये सरदी का मौसम – शिशिर मधुकर (प्रणय गीत )

ये सरदी का मौसम ये ठण्डी हवाएंचल आ मुहब्बत को फिर से निभाएंतुम जो करम अपना मुझ पे करोगी मेरा दिल ये तुमको ही देगा दुआएंनहीं भूलती मुझको वो …

नज़ारा – डी के निवातिया

नज़ारा***कुछ इस तरह मुझ से किनारा कर लिया !मेरे अपनों ने घर-बसर न्यारा कर लिया !!समझता रहा जिन्हे ताउम्र मै खुद का हमदर्द !फूलों से ज़ज़्बातों को उन्होंने अँगारा …

कौन ढलना चाहे – डी के निवातिया

कौन ढलना चाहे**********है भला कौन मुसाफिर राह में जो संग चलना चाहेहर कोई चाहे नया रंग , मेरे रंग कौन ढलना चाहे !!हर किसी को है पसंद, अपनी राह …

तू ही जग का पालन हार – अनु महेश्वरी

कान्हा कर सब पे उपकार,तू ही जग का पालन हार।इंसान तेरी ये माया,कभी समझ न पाया,हमे जो भी मिल रहा है,तेरे सहारे ही चल रहा है,फिर इंसान क्यो है …

बहना-ओ-बहना –

बहना -ओ – बहना *** बहना -ओ – बहना, तेरे भाई का है कहना !गुस्सा हमसे होना नहीं, खुश सदा ही रहना !! तेरे इस प्रेम के धागे सेमुझे …

कान्हा कान्हा पुकारे ये दिल – अनु महेश्वरी 

कान्हा कान्हा पुकारे ये दिल रे,अपने भक्तो से आकर मिल ले।रात दिन लगी तेरी ही धुन रे,भक्तो की पुकार अब सुन ले,तुम दर्श आकर दिखा जाओ,सभी के गम को …

बाबा हम शिरडी आये

बाबा हम शिरडी आये, तेरे दर्शन करनेसाईं-साईं जपते-जपते, कष्ट लगे हैं मिटनेबाबा हम शिरडी आये…..दूर-दूर से लोग हैं आते, अपनी व्यथा सुनातेबस्ती-बस्ती, पर्वत-पर्वत, तेरे ही गुण गातेतेरे रूप का …