Tag: Gazal by salim raza rewa

बुलन्दी मेरे जज़्बे की – salimrazarewa

बुलन्दी मेरे जज़्बे की ये देखेगा ज़माना भीफ़लक के सहन में होगा मेरा इक आशियाना भीअकेले इन बहारों का नहीं लुत्फ़-ओ-करम साहिबकरम फ़रमाँ है मुझ पर कुछ मिजाज़-ए-आशिक़ाना भीजहाँ …

जहां में तेरी मिसालों से रौशनी – सलीम रज़ा

जहां में तेरी मिसालों से रौशनी फैलेकि जैसे चाँद सितारों से रौशनी फैलेतुम्हारे इल्म की खुश्बू से ये जहाँ महकेतुम्हारे रुख़ के चराग़ों से रौशनी फैलेक़दम क़दम पे उजालों …

राह पर सदाक़त की गर – सलीम रज़ा

साथ तुम नहीं होते कुछ मज़ा नहीं होतामेरे घर में खुशियों का सिलसिला नहीं होताराह पर सदाक़त की गर चला नहीं होतासच हमेशा कहने का हौसला नहीं होताकोशिशों से …

दूर जितना ही मुझसे जाएंगें-सलीम रज़ा

दूर जितना ही मुझसे जाएंगेमुझको उतना क़रीब पाएँगेफिर से खुशिओं के अब्र छाएंगेडूबते तारे झिल मिलाएंगेकुछ न होगा तो आंख नम होगींदोस्त बिछड़े जो याद आएंगेमाना पतझड में हम …

मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ – सलीम रज़ा

मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता हैजो यक ब यक ही मुझसे तू हो गया ख़फ़ा हैटूटी हुई हैं शाख़ें मुरझा गई हैं कलियाँतेरे बग़ैर दिल का गुलशन …

शाम-ए-रंगीं गुलबदन गुलफा़म है- सलीम रज़ा

__________________________शाम-ए-रंगीं गुलबदन गुलफा़म हैमिल गए तुम जाम का क्या काम हैजिससे रोशन मेरी सुब्ह-ओ-शाम हैमेरे होटों पे फक़त वो नाम हैमेरा घर खुशिओं से है आरास्तामेरे रब का ये …

पहले ग़लती तो बता दे मुझको- SALIMRAZA REWA

पहले ग़लती तो बता दे मुझकोफिर जो चाहे वो सज़ा दे मुझकोसारी दुनिया से अलग हो जाऊँख़ाब इतने न दिखा दे मुझकोहो के मजबूर ग़म-ए-दौरां सेये भी मुमकिन है …

उसे ख़्यालों में रखता हूँ – सलीम रजा

उसे ख़्यालों में रखता हूँ शायरी की तरहमुझे वो जान से प्यारी है ज़िंदगी की तरहतमाम उम्र समझता रहा जिन्हे अपनागया जो वक़्त गए वो भी अज़नबी की तरहमहक …

सलीम रज़ा रीवा की 101 ग़ज़लें – gazal’s of salimraza rewa

#salimrazarewa #salim-raza-rewa #qita #muktak #behtreen #shayri #sher #gazal #urdushayri_________________________ Nov-19रुख़ से जो मेरे यार ने पर्दा हटा दियामहफ़िल में हुस्न वालों को पागल बना दियाउसके हर एक अदा पे …

चांदनी है या कोई मोतियों की माला है – SALIM RAZA REWA : GAZAL

.. चांदनी है या कोई मोतियों की माला है मेरे घर के आंगन में तुमसे ही उजाला है .. उसकी ही हुक़ुमत है उस का बोल बाला है जिसके …

ग़ज़ल : हुस्न-ए-जाना लब की लाली – सलीम रज़ा रीवा

..हुस्न-ए-जाना लब की लाली रंग धानी फिर कहाँवो नहीं तो ग़ुंचा-ओ -गुल रात रानी फिर कहाँ ..दोस्तों संग खेलना छुपना दरख़्तों के तलेवो सुहानें पल कहाँ यादें सुहानी फिर …

ग़ज़ल – दिलबर तुम कब आओगे . सलीम रज़ा रीवा

दिलबर तुम कब आओगे सबआस लगाए बैठे हैं “देखो फूलों से अपना घर – बार सजाए बैठे हैं “.हम तो उनके प्यार का दीपक दिल में जलाए बैठे हैं …