Tag: ग़ज़ल

जुदा हो जाऊँगा – डी के निवातिया

जुदा हो जाऊँगा *** कोई रोकना चाहेगा लाख फिर भी जुदा हो जाऊँगा लगाकर गले मौत को,  जिंदगी से ख़फ़ा हो जाऊँगा !! चाहकर भी कुछ न कर पायेगा …

औकात दिखा दी – डी के निवातिया

औकात दिखा दी *** इक बीमारी ने इंसानों को उनकी औकात दिखा दी, इंसान के भेष में छुपे हुए हैवानों की जात दिखा दी ! कोई रोता अपनो को …

रोना याद आया – डी के निवातिया

रोना याद आया *** रोते हुए देखा पड़ोसी को तो रोना याद आया, जब भूख लगी, तब फ़सल बोना याद आया ! सोया था पैर पसार कर, बड़े ही …

तेरी भी खता है – डी के निवातिया

तेरी भी खता है *** ख़ुदा की रज़ा क्या है ये किसे पता है, किसी और को दोष देना बड़ी धता है! जो भी हुआ है सबक ले कुछ …

चल देता हूँ मैं – डी के निवातिया

चल देता हूँ मैं *** कुछ लिखता हूँ, और लिखकर चल देता हूँ मैं, क्रोध में भी मस्ती को भरकर चल देता हूँ मैं ! है पसंद मुझे, सब …

ग़ज़ल (जब तलक उनकी करामात)

बह्र:- 2122 1122 1122 22 जब तलक उनकी करामात नहीं होती है, आफ़तों की यहाँ बरसात नहीं होती है। जिनकी बंदूकें चलें दूसरों के कंधों से, उनकी खुद लड़ने …

नाकामी – शिशिर मधुकर

फूल वो सुख नहीं देता जिसकी खुशबू में खामी है तुम आगे बढ़ नहीं सकते अगर मन में गुलामी है भले कांटें अनेकों हैं महकते गुल की सोहबत में …

ग़ज़ल (बुझी आग फिर से जलाने लगे हैंं)

भुजंगप्रयात छंद आधारित (122*4) ग़ज़ल (बुझी आग फिर से जलाने लगे हैंं) बुझी आग फिर से जलाने लगे हैं, वे फितरत पुरानी दिखाने लगे हैं। गुलों से नवाजा सदा …

अपने ही घर में बेगाना हूँ – डी के निवातिया

अपने ही घर में बेगाना हूँ, हालत पर अपनी बेचारा हूँ ।। मैं सबका सब मेरे है फिर भी, अपनों के बीच अनजाना हूँ,।। कहने को है सारा शहर …

नुकसान – शिशिर मधुकर

तोड़ देना काश रिश्तों को बहुत आसान होता मन तनहा देखो हमारा फिर तो ना परेशान होता राहगीरों की खबर जो पूछ कर के जान लेते इस सफर में …

बिना मुस्कान के – शिशिर मधुकर

दर्द कोई पल रहा हो दिल में गर इंसान के फिर तुम्हें हरदम दिखेगा वो बिना मुस्कान के हर तरफ बिखरा पड़ा है घोंसला वो प्यार का दिख रहे …

बिना आत्मा – शिशिर मधुकर

मुद्दत हुई जब मिलोगे कुछ तो बताओगे मन की तुम्हें याद करनी पड़ेगी हर बात अपने वचन की सीने में कांटे गड़े हैं लेकन ना मैं रो रहा हूं …

अभी भी कसर है – शिशिर मधुकर

यूं ही नहीं हम परेशां ये सब तुम्हारा असर है मिलना मिलाना हुआ है लेकिन अभी भी कसर है तुम दूर बैठे हो छुप के आते नहीं सामने अब …

खुद में सिमट रहे हैं – शिशिर मधुकर

अपनी क्या तुमको बताएं मुश्किल से दिन कट रहे हैं बिन तेरे लम्हें सुकूं के जीवन से नित घट रहे हैं जाने पसीजो के फिर तुम या यूं ही …

अब समझ आने लगा – शिशिर मधुकर

तुम सयाने हो गए हो अब समझ आने लगा आईना हमको तुम्हारे सच को दिखलाने लगा जिंदगी रूकती कहां है हो गया सो हो गया अब हमें खुद का …

कोशिश करो ना – शिशिर मधुकर

तुमसे जुदाई लम्बी हुई है मिलने की फिर से कोशिश करो ना दुनिया तो ताने देती रहेगी इतना भी इससे सुन लो डरो ना मुद्दत से मेरी झोली है …