Tag: दोहे

कविजन भाग-2

(इमेज पढने में दिक्कत हो तो ब्लॉग पर जाएँ) महारथी हैं सर्वजीत विषय अकेला होय । एक विषय अनेक भाव लिखना मुश्किल होय । देखन में नेता लगै बन …

मरुभूमि और महाराणा(दोहे) ः उत्कर्ष

★★मरुभूमि और महाराणा★★ पंद्रह सौ चालीसवाँ,कुम्भल राजस्थान । जन्म हुआ परताप का,जो माटी की शान ।। माता जीवत कँवर औ,तात उदय था नाम । पाकर ऐसे वीर को,धन्य हुआ …

अलंकृत दोहे ……

अलंकृत दोहे …… कल कल करलव करती कावेरी बहती करके कलनाद ! शिला सहित अगड बगड, नहाते उतरे जीवन नैया पार !! घन घन करती घटा चली,गरजे घट में …

दिखावे का दौर

दिखावे का दौर प्रदर्शन अभिनय दिखावे का आया कैसा दौर जिसपे बसी सारी दुनिया बोलबाला चहुँ और भक्ति हो या शक्ति हो सब पर इसका राज सब पर हावी …

निज शिष्या के बाल

1-. चमचा पूरा देश अरु चमची प्रजा महान। अपना ही घर लूटते चोर,भ्रष्ट,बेईमान॥ 2- जिसको चाहें लुट लें देकर घूंस जनाब। हाथ जोड़कर चल पड़ें छापें ह्रदय घाव॥ 3- …

सपा सफा दोहे

सपा समर्थन था किया वोट सपोर्ट प्रचार | शिक्षक बनना ख्वाब था हैं भिक्षक लाचार || सपा समर्थक नें किया दिल पर ग़हरा घात | काम धाम तो सब …

महाकवि तुलसी-महिमा

दन्त पंक्ति पट खोल, मुख महिं बोला राम जब| सुत उपजा अनमोल, हुलसी हुलसी, जग चकित|| (सोरठा) राजापुर शुभ रत्न समाना| उपजा जहँ तुलसी विद्वाना|| छंद शिरोमणि बाबा तुलसी| …

जमाना उल्टा है (कलयुगी दोहे)

रहिमन जमाना उल्टा है, मांगे मिले ना भीख। बिन मांगे नोट मिले, चमचागिरी तो सीख ॥ रहिमन राशन राखिये, बिन राशन सब सून । जनवरी की चीनी मिले, जब …

कहाँ गए नलकूप

दोहे  पहले ओला गिर गया, गडमड पैदावार ! कैसी गर्मी बेशरम,     आयी है इसबार !!  . झुरमुट-झुरमुट झांकता, रात में नन्हा चाँद ! पर ज्यों-ज्यों दिन चढ़ …

पावस दोह

आवत देख पयोद नभ,पुलकि‍त कोयल मोर। नर नारी खेतन चले, लि‍एसंग हल ढोर।।1।। पावस की बलि‍हारि‍ है पोखर सर हरसाय। बरखा शीतल पवन संग, हर तरवर लहराय।।2।। क्‍यूँ दादुर …

गुरुवे नम:

अक्षर ज्ञान दि‍वाय कै, उँगली पकड़ चलाय। पार लगावै गुरु ही या, केवट पार लगाय।।1।। बन गुरुत्‍व धरती नहीं, धुर बि‍न चलै न काक। गुरुजल बि‍न संयंत्र परम, गुरु …

काक बखान

कोयल कौ घर फोर कै, घर घर कागा रोय। घड़ि‍यल आँसू देख कै, कोउ न वाकौ होय।।1।। बड़-बड़ बानी बोल कै, कागा मान घटाय। कोऊ वाकौ यार है, ‘आकुल’ …

पि‍तृ महि‍मा

माता कौ वह पूत है, पत्‍नी कौ भरतार। बच्‍चन कौ वह बाप है, घर में वो सरदार।।1।। पालन पोषण वो करै, घर रक्‍खै खुशहाल। देवै हाथ बढ़ाय कै, सुख …

मधुबन माँ की छाँव

‘आकुल’ या संसार में, एक ही नाम है माँ। अनुपम है संसार के, हर प्राणी की माँ।।1।। माँ की प्रीत बखानि‍ए, का मुँह से धनवान। कंचन तुला भराइये, ओछो …

गणेशाष्‍टक

धरा सदृश माता है, माँ की परि‍क्रमा कर आये। एकदन्‍त, गणनायक, गणपि‍त प्रथम पूज्‍य कहलाये।।1।। लाभ-क्षेम, दो पुत्र, ऋद्धि‍-सि‍द्धि‍ के स्‍वामि‍ गजानन। अभय और वर मुद्रा से करते कल्‍याण …