Tag: दोहे

कुण्डलिया छंद – डी के निवातिया

कुण्डलिया छंद *** मात  दात्री जन्म की , पिता जीव आधार। धरा  गगन के  मेल से, अदभुत  ये संसार।। अदभुत ये संसार, गजब कुदरत की माया। पल में बदले …

छंद-दोहा-बजी चैन की बांसुरी…

II छंद – दोहे II लौ व्यापत है एक ही, देखो जिस भी ओर….इधर उधर क्यूँ भागते, भीतर नंदकिशोर… कान्हा कान्हां मैं करूँ, कान्हा नज़र न आय…कभी पकड़ लूँ …

करो विचार – डी के निवातिया

करो विचार ***नेता को कब क्या मिले, इस पर करो विचार !जिसने जितना खा लिया, वसूल करो उधार !! ! डी के निवातिया Оформить и получить экспресс займ на …

योग – डी के निवातिया

योग >< नेता तोंदू राम थे, करे दिवस का योग !योगी बने एक दिन के, बरस लगावे भोग !! योग नाम पे लूट रहे, कर दिखावे का ढोंग !बैठ …

नैन दियो भरमाए…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

देख देख तन आपना, काहे का अभिमान….पल में टूटे खिलौना, आन पड़े शमशान….साँच साँच  तू  बोल  के, झूट  साँच  बनाये….साँच अग्नि जब आ जली,सबहि दिया जलाये…मेरे मन में राम …

फल — डी के निवातिया

फल रहीम काम आय भई, ना काम आय राम !बाबा कि लुटिया डूबी, बड़े भये बदनाम !! राम संग रहीम जुड़े, बाबा काटे जेल !नेता धोखा दे गये, कैसे …

कवि – दोहे – डी के निवातिया

कवि लिख लिख रचना कवि भये, मांगे सबका प्यार !खुद न  किसी  को  भाव  दे, बन कर रचनाकार !! नवयुग का आधार है, करते मन की बात !सबका चाहे …

झूठ बिके बेमोल — डी के निवातिया

झूठ बिके बेमोल झूठ के संग झूठ चले, सच ना सच के साथ! चोरो की टोलिया बने, साद अकेले हाथ !! साँच खड़ा बाजार में,  झूठ बिके बेमोल ! …

गोरक्षा (दोहे)

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सन्देश (दोहे) – विजय कुमार सिंह

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७४. महोब्बत…………….. हो गयी है |गीत| “मनोज कुमार”

महोब्बत हो गयी है हो गयी है हो गयी हैकसम से यार जानेमन महोब्बत हो गयी हैतुम्हीं से यार बेइन्तहा महोब्बत हो गयी हैमहोब्बत हो गयी है हो गयी …

जयहिंद शहीद (दोहे)

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सुसंगत — दोहे — डी. के. निवातिया

दोहेमोल तोलकर बोलिये, वचन के न हो पाँव !कोइ कथन औषधि बने, कोइ दे घने घाव !!………..(१)दोस्त ऐसा खोजिये, बुरे समय हो साथ !सुख में तो बहुरे मिले, संकट …

-दोहे- लिखने का प्रथम प्रयास

“ऐसे क्रोध संभालिए, जो गागर में नीर।कटु वचन मत बोलिए, चुभे ह्रदय में तीर।।””जाकी छवि निहारन सो, मिले ह्रदय का चैन।वाको सम्मुख राखिए, दिन हो चाहे रैन ।।”(विवेक बिजनोरी) …

गोरक्षा (दोहे)

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इसरो की नई उड़ान

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शिक्षा के दोहे

दीवाने -ग़ालिब पढो, महावीर यूँ आप उर्दू -अरबी -फारसी, हिन्दी करे मिलाप // १ .// शिक्षा -दीक्षा ताक पर, रखता रोज़ गरीब बचपन बेगारी करे, फूटे हाय नसीब // …

कविनामी दोहे—दोहाकर : महावीर उत्तरांचली

सब कहें उत्तरांचली, ‘महावीर’ है नाम करूँ साहित्य साधना, है मेरा यह काम //१. // ‘महावीर’ बुझती नहीं, अंतरघट तक प्यास मृगतृष्णा मिटती नहीं, मनवा बड़ा हतास //२. // …

कृष्ण नामी दोहे—दोहाकार : महावीर उत्तरांचली

गीता मै श्री कृष्ण ने, कही बात गंभीर औरों से दुनिया लड़े, लड़े स्वयं से वीर //१. // लाल यशोदानंद का, गिरिधर माखन चोर दिखता है मुझको वहां, मै …

राम नामी दोहे—दोहाकार: महावीर उत्तरांचली

देह जाय तक थाम ले, राम नाम की डोर फैले तीनों लोक तक, इस डोरी के छोर //१. // भक्तों में हैं कवि अमर, स्वामी तुलसीदास ‘रामचरित मानस’ रचा, …

प्रदूषण के दोहे—दोहाकार : महावीर उत्तरांचली

शुद्ध नहीं आबो-हवा, दूषित है आकाश सभ्य आदमी कर रहा, स्वयं श्रृष्टि का नाश //१// ओजोन परत गल रही, प्रगति बनी अभिशाप वक़्त अभी है चेतिए, पछ्ताएंगे आप //२// …

पर्यावरण के दोहे—कवि: महावीर उत्तरांचली

छह ऋतु, बारह मास हैं, ग्रीष्म-शरद-बरसात स्वच्छ रहे पर्यावरण, सुबह-शाम, दिन-रात // १ // कूके कोकिल बाग में, नाचे सम्मुख मोर मनोहरी पर्यावरण, आज बना चितचोर // २ // …

महंगाई के दोहे—दोहाकार : महावीर उत्तरांचली

महंगाई डायन डसे, निर्धन को दिन-रात धनवानों की प्रियतमा, पल-पल करती घात //१// महंगाई के राग से, बिगड़ गए सुरताल सिर पर चढ़कर नाचती, झड़ते जाएँ बाल //२// महंगी …