Tag: समसामयिक

मातृभूमि का श्रृंगार करो – डी के निवातिया

आज़ादी के पावन दिन पर, मातृभूमि का श्रृंगार करो देश ध्वजा का संदेश यहीं, वैर  भाव का संहार करो।। जो मिट गए, जो खो गए, हाथ थाम तिरंगा सो …

हुई महंगी मुबारकबाद -डी के निवातिया

हुई महंगी मुबारकबाद *** हुई महंगी बहुत ही मुबारकबाद, के सोच समझ कर दिया करो, देना हो जरूरी,तो रखना हिसाब, हर घड़ी हर शख्स को न दिया करो..!! कुछ …

आदमी है, खाता है – डी के निवातिया

आदमी है, खाता है, *********** आदमी है, खाता है, खाकर भी गुर्राता है, करता है खूब चोरी साथ में सीना जोरी कर के गर्व से चौड़ी छाती लाल पीली …

रिश्ते – डी के निवातिया

रिश्ते *** *** रिश्ते वही मगर, रिश्तो में रिश्तो की वो बात नहीं है, सम्बन्ध वही, मगर सम्बन्धो में ज़ज्बात नहीं है, घर में बैठे, चार प्राणी अपनी गर्दन …

तू कैसा प्रेमी है – डी के निवातिया

तू कैसा प्रेमी है !! *** देता है न माँगता सोता न जागता न रोता न हँसता भागता न थकता देखता न तकता, बोलता न बकता, सभी को लगता …

कैसा ये सावन आया – डी के निवातिया

  कैसा ये सावन आया, मुझको अबकी ना भाया, बारिश की इन बूंदों ने जी भर मुझको तड़पाया ।। बागों में कोयल बोले, कानो में मिश्री घोले, अमवा की …

माहिया विधा रचना – डी के निवातिया

१.आना मेरे साजन,खुशियों की डोली,लेकर मेरे आँगन !! २.जिस दिन तू आएगा,झूमेगा ये मन,नाचेगा, गाएगा  !! ३.जब मेरी सजे डोली,रात दिवाली कीदिन में होगी होली ।।४.दर्शन को मैं तरसीसावन …

मैं क्या हूँ ? { श्रमिक वर्ग की वेदना }

दिखने में तो इंसान हूँ ,मगर क्या वास्तव में इंसान हूँ ?न दिल अपना ,न दिमाग अपना ,जो जिधर कहे वहीं चला जाता हूँ ।कभी गाँव से शहर की …

ज़ाम-ऐ-शराब – डी के निवातिया

ज़ाम-ऐ-शराब *** इश्क में हमे न वफ़ा का गुलाब चाहिए,ख़िदमत में न दावत-ऐ-क़बाब चाहिए !हम तो आशिक, मजनूं, दिवाने यार है,उनकी आँखों से ज़ाम-ऐ-शराब चाहिए !! *** स्वरचित – …

कोरोना वीरो को प्रणाम – डी० के० निवातिया

कोरोना वीरो को प्रणाम *** कोरोना वीरो का अमिट बलिदान,याद रखेगा बच्चा बच्चा हिंदुस्तान,इनकी मेहनत औ दरियादिली का,गुणगान युगों युगों करेगा ये जहान !! डर अब अंतस में रम …

हे मेरी प्राण प्रिये – डी के निवातिया

शादी की सालगिरह के विशेष अवसर पर प्राण प्रिय अर्धांग्नी को समर्पित ह्रदय के भावो को शब्द माला में गूंथकर काव्य रूप में संजोने का एक प्रयास: ___ हे …

काली रात आयी है – डी के निवातिया

काली रात आयी है *** डोली में सजकर, माँ के घर, ये कैसी सौगात आई है,तिरंगे में लिपटे देखो, बाँके दूल्हों की बारात आई है। एक बार फिर से …

पर्यावरण दिवस – डी के निवातिया

पर्यावरण दिवस *** पेड़-पौधे काटकर बैनर, पोस्टर बना रहे है, संदेशो में जागरूकता अभियान चला रहे है । ! विलासिता पूर्ण जीवन जीने की चाहत में, हम प्राकृतिक सम्पदा …

होली – डी के निवातिया

शीर्षक :- मैं होली कैसे खेलूँरचनाकार:- डी के निवातिया ! विषय : – होली कोई रंग न मोहे भाये, मोरा दिल चैन न पाएंमै होली कैसे खेलूँ, मोरे साजन …

काम जोरो पर है – डी के निवातिया

काम जोरों पर है +++***फूटी किस्मत लिखी, कागज़ कोरों पर है,खुद करके काली करतूत दोष औरों पर है !! टूट-फूट कर बिखरें, भू-माता के टुकड़ेंउनकी मरम्मत का काम जोरों …

अयोध्या विवाद का पूरा इतिहास

अयोध्या विवाद का पूरा इतिहास, जानें अब तक क्या-क्या हुआ, 25 बड़ी बातें अयोध्या में मंदिर मस्जिद के लिए मुकदमा लड़ते सवा सौ साल हो गया है. इस एक …

शोलो से लड़ना होगा – डी. के. निवातिया

शोलो से लड़ना होगा *** सहते – सहते, सह  रहे है हम,सदियों से आतंक की अठखेलियां, कितने आये कितने गए सत्तारूढ़ बुझा रहे आजतक सिर्फ पहेलियाँ,कुछ तो खामी होगी …

पीड़ा की लहरें – शिशिर मधुकर

शहीदों की चिताओं पर उठी पीड़ा के लहरें हैं मगर सोचो ज़रा हम ही तो असली अंधे बहरे हैसोचते रहते हैं एक दिन शेर भी घास खाएगाजेहादी बुद्ध बन …

हमारी हम, तुम्हारी तुम जानों – डी के निवातिया

हमारी हम जानें, तुम्हारी तुम जानों *** *** *** !तुम में रमते हम और हम में तुम होये एहसास-ऐ-दिल कभी तो पहचानोंसच, करीब कितने है हम एक दूजे के,हमारी …

क्या कहना – डी के निवातिया

क्या कहना ! मेरे देश के चौकीदारों का, क्या कहना, भई क्या कहना।एक से बढ़कर एक आया, कोई भाई बनकर, कोई बहना ।। क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।क्या कहना …

जिम्मेदारी – शिशिर मधुकर

अमृतसर में उजडा दशहरे का मेला कैसा ये खेल देखो कुदरत नें खेलानज़र सावधानी से थोड़ी जो हट गई रेल कीं पटरी फिर लाशों से पट गईदेखी जो घटना …