Tag: कविता संग्रह

कुंडलिया छंद

1-श्री गणपति करिए कृपा, माँ शारद दो ज्ञान | ज्योतिष पर कुछ लिखसकूँ, हो न कभीअभिमान || हो न कभी अभिमान,कृपा श्री राघव कर दो | बजरंगी हनुमान,दास को …

” गुलिस्ताँ ” (साहित्य की फुलवारी )

साहित्य प्रेमियों के लिए ख़ुशी की बात है की साहित्य समूह के कुछ सदस्यों ने एक साथ मिलकर एक पुस्तक ” गुलिस्ताँ ” (साहित्य की फुलवारी ) का सफल …

कुछ यादें बीते साल की – सोनू सहगम –

-: कुछ यादें बीते साल की :-कुछ यादें बीते साल की,नये साल में बहुत याद आयेगीकुछ यादें माना आँखें करेंगी नामकुछ यादें चहरे पर मुस्कान खिलायेगीकुछ यादें जिनका साथ …

मेरी कहानी मेरी जुबानी भाग-2 (POEM No. 21) CHANDAN RATHORE

कुछ साल और निकले में पढता रहा सब मुझे पढ़ाते रहेआ गया वो दिन जिस दिन होना था माँ से दूरसब छोड़ गये अकेले कोई नही था मेरे पासअकेले …

Mrat Kaaya Ka Rodan (मृत काया का रोदन) POEM NO. 230 (Chandan Rathore)

POEM NO . 230————मृत काया का रोदन————मृत काया के लिए हुआ आज फिर करुणा मय रोदन |छोटे छोटे बच्चों की आशाओं का हुआ शोषण ||रूठ गए जग छोड़ गए …

Aaj udas hu me (आज उदास हु में) POEM No. 11 (Chandan Rathore)

POEM NO. 11————–आज उदास हु में———————आज मन्न उदास हे पता नही क्यों ये मन्न उदास हेक्या में दोसी हु जो में उनकी केयर करता हुया वो दोसी हे जो …

कुछ लम्हें – कुछ पल – सोनू सहगम

-: कुछ लम्हें –कुछ पल :-उसने धीरे से बेड से उठते हुएफुसफुसाकर कहा मेरे कान मेंक्या तुमको वो लम्हा याद है,जब हम मिले थे पहली बार अनवर चाचा की …

परवाना

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मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँदबी हुई पहचान नहीं हूँमै स्वाभिमान से जीती हूँरखती अंदर ख़ुद्दारी हूँमै आधुनिक नारी हूँपुरुष प्रधान जगत में मैंनेअपना लोहा मनवायाजो काम मर्द करते आयेहर …

* शब्द का शब्दार्थ *

* शब्द का शब्दार्थ *शब्द का शब्दार्थ भिन्न हैया मानसिकता का है बिसात आइए आपको सुनाता हूँजीवन का एक बात,मित्र का मेहमान ने पूछाक्या करते हैंहमने कहा नौकरीउन्होंने पूछा …

* पैसा *

* पैसा *पैसा से प्यार इजहार इकरार आज बना यह मुख्य व्यापार,पैसा से इज्जत पैसा से पहुंचकलजुग में यह अस्त्र अचूक,पैसा हर रास्ते का साधनआज का यह एक प्रमुख …

* अंधियारा *

*अंधियारा*हमें अंधियारा पसंद हैजहाँ शान्ति का संगम है,बहुत लोग हैं इसे बुरा मानते बुराई का प्रतिक हैं इसे जानते ,सारे प्रकाश का यह केंद्र है सूर्य निर्माण में यह …

यह अपना लोकतंत्र है मेरी जान

*यह अपना लोकतंत्र है मेरी जान*यह अपना लोकतंत्र है मेरी जान यहाँ घोड़ा गदहा एक समानभाड़ ढोए या रेस में दौड़ेंकिसी का भी नहीं रहेगी अलग पहचान,यह अपना लोकतंत्र …

रास्ता मैं बतलाता हूँ- आशीष अवस्थी

राहों के पत्थर देखे इतनेके अब नहीं संभल पाता हूँअपने पीछे चलते चलतेखुद से दूर निकल जाता हूँअब तो कोई रोक लो आकेमैं लीक तोड़ कर जाता हूँफिर न …

मैं शरीफ था इसलिए चुप रहा- आशीष अवस्थी

मैं शरीफ था इसलिए चुप रहालोगों ने समझा मुझे जवाब नहीं आता जब से शराफत निकाल के फेंकी मैंने अब लोगों को सवाल नहीं आता कुछ सोच कर बख्शे थे …

जब जब महकती ये यादें तुम्हारी हैं- आशीष अवस्थी

अब मिलता नहीं, जो आंसू छुपा के रखा था कहींना ही वो जिंदगी जो तन्हा गुज़ारी हैना ही वो बातें जो तुम करती थी कभीना ही वो सपने जो …

* माँ मुझे बच्चा रहना है *

माँ मुझे बच्चा रहना हैबड़ी-बड़ी बातें हमें नहीं करना सहिष्णुता-असहिष्णुता का पाठ हमें नहीं पढ़ना इमाईनुल , मोहन, रहीम संग खेलना है माँ मुझे बच्चा रहना है ।बड़ा हो …

“उनके चरणों में खुदा होगा”

 किस तूफ़ान को देख डरा है तू !बिना खिवाए जो कस्ती तेरी किनारे पर लगा देगा।तू किस खुदा को बन्दे भूला है !बिन बताये जो अपना ,तेरे घर का …

कम्पित होती धरती ,और प्रेम हमारा हुंकार भर रहा।

एक दूजे को मर मिटने को देखो कैसे बीज वो रहा।पल पल चढ़ते यौवन में हृदय कैसे गंबीर हो रहा।कैसे देखो लौ दीपक की ऊंचाई तक चढ़ने लगी है।कैसे …