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कुंडलिया छंद

1-श्री गणपति करिए कृपा, माँ शारद दो ज्ञान | ज्योतिष पर कुछ लिखसकूँ, हो न कभीअभिमान || हो न कभी अभिमान,कृपा श्री राघव कर दो | बजरंगी हनुमान,दास को …

सावन – छंद चौपाई….

II छंद – चौपाई IIकारे कारे बादल आये, मन मेरे को नाच नचाये….मेघा गरजे बिजली चमके, डर कर मेरा मनवा दुबके…देखूं राह मैं चढ़ अटरिया, कब आएंगे पिया नगरिया…घूमूं …

“शिवेंद्रवज्रा स्तुति”

“शिवेंद्रवज्रा स्तुति”परहित कर विषपान, महादेव जग के बने।सुर नर मुनि गा गान, चरण वंदना नित करें।।माथ नवा जयकार, मधुर स्तोत्र गा जो करें।भरें सदा भंडार, औघड़ दानी कर कृपा।।कैलाश …

भोला बम बम भोला…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

II छंद – चौपाई IIकहते हैं शमशान निवासी, रोम रोम रम रहा सुवासी…आदि अंत का जो है ज्ञाता, महादेव वो है कहलाता..पी कर ज़हर अमृत देता वो, ऐसा वैरागी …

विधा : कहमुक़री

सुबह शाम   मैं   उसे   रिझाऊँनैन पलक पर  जिसे    बिठाऊँबिन  उसके   दिल    है  बेहालक्यों सखि साजन?ना गोपाल घड़ी – घड़ी   मैं   राह   निहारूँसुबह  शाम  नित  उसे पुकारूँदरस    …

मनमीत….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

II  छंद – सरसी  IIकैसी प्रीत जगाई कान्हा, मन मांगे चितचोर….सारी रात आँख न भींचूँ, आस मिलन में भोर…भूख प्यास मोहे न लागे, मन की एक ही रीत…मिल जाए …

नेता का देश प्रेम…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

II छंद – श्रृंगार IIजात पात लाठी रहा भांज Iआग दे रहा धर्म को आज IIमूंछ को नेता दे के ताव Iबोलता देश प्रेम के ‘भाव’ II\/सी. एम्. शर्मा …

नटखट ललन — डी के निवातिया

 नटखट ललन (“सरसी छंद”) ठुमक ठुमक चलते सावरिया, पग पग कदम बढ़ाय छन छन से छनकते  घुंघरू,  मधुर सी धुन सुनाययशोदा दर खड़ी इतराती, नटखट ललन लुभायदेवलोक से  देव निहारे, …

नमामी महांदेव गंगा धराये….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

II छंद – भुजंगप्रयात II( यमाता x 4 / 122×4 )नमामी महांदेव  गंगा  धराये    Iजटाजूट शंभू पिनाकी धराये    IIनमामी कपाली भक्तवतसलाये Iनमामी नमामी मृतुन्जय शिवाये II (नमन …

नमो देव भोले…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

II छंद – भुजंगप्रयात IIनमो देव भोले नमो देवनाथं   Iनमो शंकरा सर्व भूताधिवासं IIनमो शूलपाणी विरूपाक्ष रूद्रं Iनमो अंबिकानाथ पादार्विन्दं  II(नमन करता हूँ मैं उस शिव को जो …

रम जाओ तुम मुझमें ऐसे..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

IIछंद-चौपाईIIरम जाओ तुम मुझमें ऐसे,रंग मिला पानी में जैसे…तुम सज जाओ ऐसे दिल में,जैसे देव सजे मंदिर में….ढूंढूं कहीं खुदा मैं क्यूँकर,मंदिर हो चाहे गिरिजा घर…चाहूँ देखूँ दिल में …

प्रेम मोल….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

II छंद – उल्लालाIIकान्हा नयन बह रहे, सुदामा चरण धुल रहे Iनिर्मल छवि ये देख के,सब लोक धन्य हो रहे IIप्रेम मोल अनमोल है, जो प्रेम ही आंक सके …

सांवरिया

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माँ-ईशवर……सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

IIछंद-चोपाईIIकर जोर खड़ा प्रभु के आगे, मन में भाव कभी ही जागे…माँ ‘चंदर’ आवाज़ लगायी, रोम रोम मिठास घुल आयी…कैसे कथन करूं जस तैसा, अनुभव जो गूंगे के जैसा…ईशवर …

मात-प्रेम…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

IIछंद-चौपाईIIदाम पड़ती छोटी जाए, कृष्णा उदर बंध ना पाए…माँ लल्ला का बंधन चाहे, योगी भी पकड़ना चाहे…माया धारी में जो उलझे,योग ज्ञान तप से ना सुलझे…बलिहारी लीला पे जाऊं,बिना …

माँ महिमा….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

IIछंद-चोपाई IIमैया चाँद दिला दो मुझको,गर लगता मैं प्यारा तुझको…नहीं मिला जो चाँद खिलौना,गुस्सा मैं फिर तुमसे होना…मत अपना तुम लल्ला कहना,नन्द लाल मैं बन के रहना…कृष्णा माँ महिमा …

ममता बंधन….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

IIछंद-चोपाईIIनटखट कान्हा भागें आगे, मात यशोदा पीछे पीछे…पकड़ लिए कान्हा जब माँ ने, बाँध दियो ओखली संग में….जिसको देखे टूटें बंधन, बंधे वो ममता के बंधन…बलिहारी जाऊं मैं उसके, …

“माँ” को समर्पित…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

IIछंद – चौपाईIIऊषा किरणें चरण पखारें, पुरवाई चंवर झुलायें…नाटक करते नटखट कान्हा, मूंदें आँखें ज्यूं सोने का…बलिहारी लीला पे उसकी, श्याम सलोनी सूरत जिसकी ….डांटे माँ ये चाह उसे …

लौट आ अपने भीतर तू रे….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

IIछंद-चौपाईIIचल घर चल अब भटक न तू मन…रोने से ना होगा कुछ सुन…औरों की ना सुन अब तू रे…लौटा अपने भीतर तू रे…जीवन हर पल चलता यूं ही…ऊपर नीचे …

छन्न पकैया….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

छन्न पकैया छन्न पकैया, बसंत राजा आये…बगिया में फूल खिले हैं, भँवरे भी मंडराएं…छन्न पकैया छन्न पकैया,अपनी दिल की बोली..नासमझा कूंएं में जा, जो समझा हमजोली…\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू) …

‘छप्पय छन्द’ और ‘कुण्डलिया छन्द’ सृजन हेतु

‘छप्पय छन्द‘ हिंदी छन्द परिवार का पुराना छन्द है। ‘कुण्डलिया‘ की तरह यह भी छ: पंक्तियों का छन्द है। फ़र्क़ मात्र यही है कि ‘कुण्डलिया‘ छन्द की शुरूआत ‘दोहे‘ …