Tag: Bharat Jain

जुआरी दांव पर खुद को लगाने आज बैठा है…

हार कर घर बार सारा सुख, पाने आज बैठा है,जुआरी दांव पर खुद को लगाने आज बैठा है।नहीं बाकी रही कीमत तेरी, तेरी ही नज़रों में,जो रख कर हासिये …

अब नूतनता आई है…

हटो पुरातनता जड़ता अब नूतनता आई है,निर्जीव धमनियों में फिर से नया रक्त लाई है।नयी कोपलें फूट चुकी हैं फसले पककर हैं तैयार,नये खेल नये मैदान हैं नये अशोक …