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ज़ालिम — डी के निवातिया

ज़ालिम —@@@— बाँट दिया धर्म के नाम पर दुनिया को,अरे इंसानी फ़रिश्ते तेरी जात क्या है !मै तो निर्मल जर्रा हूँ माटी-ऐ-हिन्द कातू बता ज़ालिम तेरी औकात क्या है …