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ज़लवा – डी के निवातिया

ज़लवा***जरुरी नहीं दुनियाँ में सिर्फ हुस्न का ज़लवा होहमने तो कीचड़ के हिस्से में कमल को देखा हैअभद्र हो या दीन-दरिद्र कद्र हर शै: की होती हैपत्थर  बुतो में …