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ज़माने की बदमाशी

ये तो नाइंसाफी है किमोहब्बत आपकी प्यासी हैआप ढूँढते हैं बाहरअपनों में छाई उदासी है |भर लीजिये बाँहों मेंकितना भी चोरी सेप्रीत वही टिकती हैजो दिल की साची है …