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ग़ज़ल(ये रिश्तें काँच से नाजुक)

ग़ज़ल(ये रिश्तें काँच से नाजुक)ये रिश्तें काँच से नाजुक जरा सी चोट पर टूटेबिना रिश्तों के क्या जीवन ,रिश्तों को संभालों तुमजिसे देखो बही मुँह पर ,क्यों मीठी बात …