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हुनर- डी के निवातिया

हुनर *** छोटी छोटी बातों पर अपनों से गिला क्या, इश्क मुहब्बत में हुई बातों का सिला क्या, झुकने का हुनर जरूरी है यहां जीने के लिए, अड़कर पर्वत …

हुनर

गूंथे जाते है माला में पुष्प वही हर मौसम में खिलने का जो हुनर जानते है ।। मुरझाये पुष्प स्वयं ही अक्सर, शाखाओ से टूटकर बिखर जाया करते है …