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हाँ मैं वही बसंत हूँ – डी के निवातिया

हाँ मैं वही बसंत हूँ …. =+= जो कभी नई कोंपलो में दिखता थाकलियों में फूल बनकर खिलता थाहवाओ संग ख़ुशबू लिए फिरता थाचेहरों पे नई उंमग लिए मिलता …