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स्याही में खून—डी. के. निवातिया

आज फिर कलम के निकले है आंसूजिनसे जमीन पर एक तस्वीर उभर आई है।जरुर हुई है सरहद पे कोई नापाक हरकततभी स्याही में खून की झलक नजर आई है …