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साथ — डी के निवातिया

साथ अक्सर जब टहलता हूँअकेले अकेले बांधे अपने दोनों हाथकभी उगते सूरज को निहारने की आस में सुबह सुबह,कभी सूनी सूनी मुझको घेरे रातबातो ही बातो में पूछ लिया …

साथ — डी के निवातिया

साथ जो हमेशा मेरे साथ था, वो कभी मुझसे मिला नहीं कम से कम साथ तो था, इसलिये कोई गिला नहीं पर साथ वालो से भी कोई दौलत तो …