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समर्पण…Raquim Ali

समर्पण1.शादीशुदा के लिए:उठने लगे तेरी क़लम जब एक नग़मा या खत लिखने के लिएसोच लो यह निस्बत-ए-माशूका है, या अहल-ए-खाना के लिए।हो कलाम किसी और पर, तो तोड़ देना …