Tag: शेरो-शायरी

खुला आसमान चाहिए – डी के निवातिया

खुला आसमान चाहिए चन्द ज़मीं का टुकड़ा नहीं मुझे पूरा जहान चाहिए, मैं बेख़ौफ़ परिंदा हूँ मुझको खुला आसमान चाहिए !! ! कोई बने मालिक हवेलियों के, महलों में …

दास्ताँ – डी के निवातिया

चलते आ रहे जिस पर हम वो राह पुरानी हैमिलेंगे हमसफ़र अपने यही ये चाह पुरानी है बीते लम्हो में, नीरस, कितनी उम्र गुजारी हैदास्ताँ हर एक पल कि …

अनमोल तोहफा – डी के निवातिया

मुझसे दूर जाकर, मेरे ओर करीब आ गई, अमर होकर “माँ” तू अब मुझमे समा गई !! नासमझ थी मैं, जो तुमको खोकर रोई,मालूम न था, मैं तुमको सर्वस्व …

नजरअंदाज – शिशिर मधुकर

मुझे मालूम है मैं दिल पे तेरे राज करती हूंतेरी नाराजगी तब ही नजरअंदाज करती हूंतू रूठा भी रहे मुझको तो केवल प्यार मिलता हैतेरे संग मिल के मैं …

शेर – डी के निवातिया

ख्याल *** बड़ी शिद्दत से मैं  ये काम  कर रहा हूँ ,जीने की चाहत में हर रोज़ मर रहा हूँ !! Оформить и получить экспресс займ на карту без …

खेल सियासत का -डी के निवातिया

खेल सियासत का! न खेल मेरे संग ये खेल सियासत कासच्चा होता नहीं है मेल सियासत काजहाँ मतलब में सब कुछ जायज़ हो नहीं चाहिए ऐसा बे-मेल सियासत का …

भँवर – डी के निवातिया

  भँवर से निकलूँ तो किनारा मिले, ज़िंदगी को जीने का सहारा मिलेबड़ी उलझन में है हर एक लम्हा काश किसी अपने का सहारा मिले !!!डी के निवातिया Оформить …

ग़मे-जहाँ |

सिर्फ एक शर्त पर, ग़मे-जहाँ को भूल जाऊँगा, नया ज़ख़्म दे मुझे, पुराना भरा है अभी-अभी..!मार्कण्ड दवे । दिनांकः २८-११-२०१८. Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа …

बेकाबू ।

आँधीयाँ भी पियक्कड़ हो कर, बेकाबू हो गई…!तेरी अंगड़ाई से दिल की फ़िज़ाँ, बेकाबू हो गई…!मार्कण्ड दवे । दिनांकः २८-११-२०१८. Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа …

हम-तबीयत ।

उनके अंदाज़, इशारों को, हम प्यार समझ बैठे…!हम-तबीयत मान कर, इसे इक़रार समझ बैठे…!मार्कण्ड दवे । दिनांकः २७-११-२०१८. Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые …