Tag: शिवदत्त श्रोत्रिय

खुदखुशी के मोड़ पर

जिंदगी बिछड़ी हो तुम तन्हा मुझको छोड़ करआज मैं बेबस खड़ा हूँ, खुदखुशी के मोड़ पर ||जुगनुओं तुम चले आओ, चाहें जहाँ कही भी होशायद कोई रास्ता बने तुम्हारी …

फूलो के इम्तिहान का

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय मंदिर में काटों ने अपनी जगह बना लीवक़्त आ गया है फूलो के इम्तिहान का  ||सूरत बदलने की कल वो बात करता थालापता है पता आज …

दूसरो की तलाश में

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियजब भी भटकता हूँ किसी की तलाश मेंथक कर पहुच जाता हूँ तुम्हारे पास मेंतुम भी भटकती हो किसी की तलाश मेंठहर जाती हो आकर के मेरे …

कोई सहारा तो हो

मिले नज़र फिर झुके नज़र, कोई इशारा तो होयो ही सही जीने का मगर, कोई सहारा तो हो ||स्कूल दफ़्तर परिवार सबको हिस्सा दे दियाजिसको अपना कह सके, कोई …

पिता के जैसा दिखने लगा हूँ मैं

काम और उम्र के बोझ से झुकने लगा हूँ मैंअनायास ही चलते-चलते अब रुकने लगा हूँ मैंकितनी भी करू कोशिश खुद को छिपाने कीसच ही तो है, पिता के …

दुनिया में सबसे बड़ा मजहब है

एक कहे मंदिर में रब हैदूजा कहे खुदा में सब हैतीजा कहे चलो गुरुद्वाराचौथा कहे कहाँ और कब हैमैं कहता माँ बाप की सेवादुनिया में सबसे बड़ा मजहब है …

मगर ये हो न सका

मैंने एक ख्वाब देखा था, तुम्हारी आँखों मेंहक़ीक़त बन जाये मगर ये हो न सका ||एक कश्ती ले उतरेंगे समुन्दर की बाहों मेंकोई मोड़ न होगा फिर अपनी राहों …