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वतन की किस्मत — डी के निवातिया

वतन की किस्मत *** गूंगो – बहरो ने मिलकर महफ़िल सजाई हैमिलजुलकर खाने खिलाने की कसमे खाई हैबारी बारी से बदलते रहते है अपनी कुर्सियांक्या खूब वतन की संसद …