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रोना—डी के निवातिया

रोना तो बस मन का बहलावारोकर इंसान हर दर्द सह जाताआंसुओं में अगर होती ताकतये ज़माना कब का बह जाता ।मत लुटाना ये बेशकीमती मोतीये तो पहचान है संवेदनाओं …