Tag: रिश्ते

रिश्ते – डी के निवातिया

रिश्ते *** *** रिश्ते वही मगर, रिश्तो में रिश्तो की वो बात नहीं है, सम्बन्ध वही, मगर सम्बन्धो में ज़ज्बात नहीं है, घर में बैठे, चार प्राणी अपनी गर्दन …

ग़ज़ल ( शायद दर्द से अपने रिश्ते पुराने लगते हैं)

वो हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैंजब हक़ीकत हम उनको समझाने लगते हैंजिस गलती पर हमको वो समझाने लगते हैउस गलती को फिर क्यों दोहराने लगते हैंदर्द …

दूर रह कर हमेशा हुए फासले

दूर रह कर हमेशा हुए फासले ,चाहें रिश्तें कितने क़रीबी क्यों ना होंकर लिए बहुत काम लेन देन के ,विन मतलब कभी तो जाया करोपद पैसे की इच्छा बुरी …

रिश्तों की कमीज..

रिश्ते भी कमीज सरीखे होते हैं.. कुछ नए..कुछ पुराने..तो कुछ फटे हुए.. नए वाले अच्छे हैं चमक है उनमें पार्टी फंक्शन में पहनता हूँ कुछ रौब भी जम जाता …