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कविता_ “अपनों से पहचान बढ़ाओ”

*अपनों से पहचान बढ़ाओ*दूरियां सारी अब मिटाओ ,अपनों से पहचान बढ़ाओ ;सिवईयां ईद की, इस बारी उनको ख़िलाओ ,अम्मी के हाथों का, हर पकवान चखाओं ;अपनों से पहचान बढ़ाओ …

ये कैसा प्यार – प्यार और सम्मान किसी समय,तारिक और परिस्थिति विशेष के मोहताज नही !!

आज स्कूल,कालेजो में बहुत अच्छा प्यार देखने को मिल रहा है ???? ! लड़का-लड़की कॉलेज के पास खोके के दुकान में सिगरेट,दारू और न जाने कौन सी नशीली पदार्थ का सेवन …