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मैं और तू — डी. के. निवातिया

मैं और तू *** शीर्ष लोम से चरण नख तकएक तेरे ही नाम से बंधी हूँ मैंअंग अंग किया अर्पण तुझ परसौगंध के वचनों में सधी हूँ मैं !!!कोई …