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मुझे ठोकरों में मिलाना

अब ना वो रंगे वफा दिल मेंना अब चाहतों का खजाना बस दूर से देखते हैं कितना बड़ा है मेरा ठिकाना वो करती रही शिकायतमेरे ख्वार होने कीकहाँ देख …