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माँ – डी के निवातिया

।। माँ ।। मोतियों सा भरा समंदर,लहरों सी उतार-चढ़ाव, माँ, उम्मीदों से भरा शहर जैसे,कोई ठहरी झील सी गाँव, माँ, शुभकामनाओं की लड़ी,आशीषों की बड़ी छाँव, माँ, सूरज माथे …

माँ – डी के निवातिया

 “माँ” किसी भी हाल में, हर पल खुशी देती है माँ,अपनी ज़िंदगी से सबको जीवन देती है माँ,भगवान से पहले, माँ की पूजा करो जनाब,क्योंकी भगवानों को भी जन्म …

ग़ज़ल (दुनियाँ जब मेरी बदली तो बदले बदले यार दिखे)

हिन्दू देखे ,मुस्लिम देखे इन्सां देख नहीं पायामंदिर मस्जिद गुरुद्वारे में आते जाते उम्र गयीअपना अपना राग लिए सब अपने अपने घेरे मेंहर इन्सां की एक कहानी सबकी ऐसे …

जग में तुझ सी माँ ना होगी

मैं चंचल मैं पापी भोगीजग  में तुझ सी माँ ना होगी ।दर्शन बिन रोती हैं अंखियापूरी कब अभिलाषा होगी ॥ मन्त्र न  जानूं , यन्त्र न जानूं,ध्यान न जानूं, तन्त्र …