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महबूबा -ऐ-ज़िन्दगी – डी के निवातिया

महबूबा -ऐ-ज़िन्दगी *** तुझे लिख पाना मेरे बस में कहाँ महबूबा -ऐ-ज़िन्दगी तू सागर में घुली स्याही, मैं तिनके सी तैरती कलम !! ! स्वरचित : डी के निवातिया …