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मगर से बैर – डी के निवातिया

दूसरों की मुखालफत में दिन रात रहता है, आग का दरिया बनकर पानी संग बहता है समझो कितना शातिर होगा वो शख्स, जो पानी में रहकर मगर से बैर …