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मंजर – डी के निवातिया

मंजर *** महामारी का ऐसा खंजर न देखा था हमने कभी इंसानी दिल इतना बंजर न देखा था हमने कभी, धरती रो रही है देखकर आज आसमान रो रहा …

मंजर – डी के निवातिया

मंजर *** हर मंजर से गुजर रहे है कुछ लोग,सियासत में अपना रूतबा जमाने को !न जाने कितने गुलाब मसल डाले,फकत अपने नाम का गुल खिलाने को !न ये …