Tag: भारतीय नववर्ष कविता

धरणी नववर्ष

क्रुर संस्कृति, निकृष्ट परंपरा कायह अपकर्ष हमें अंगीकार नहीं,धुंध भरे इस राहों मेंयह नववर्ष कभी स्वीकार नहीं ।अभी ठंड है सर्वत्र कुहासा , अलसाई अंगड़ाई है,ठीठुरी हुई धरा – …