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भक्ति छंद “कृष्ण-विनती”

भक्ति छंद “कृष्ण-विनती” दो भक्ति मुझे कृष्णा। मेटो जग की तृष्णा।। मैं पातक संसारी। तू पापन का हारी।। मैं घोर अनाचारी। तू दिव्य मनोहारी।। चाहूँ करुणा तेरी। दे दो …