Tag: बार-बार भ्रमित होता है मन। मन रागिनी विह्वलता में बदलजाती

मैं ढूंढ रही किसको ?

मैं ढूंढ रही किसको ?एक स्नेहिल भाव या.एक शीतल छांवकहां से आईं हूँ?कहाँ है जाना मुझे?इस अनसुलझी पहेली ने,जीवनमाला को उलझा सा दिया है।लक्ष्य की ओर बढ़ते-बढ़तेबार-बार पग थम …