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बात बड़ी है – डी के निवातिया

बात बड़ी है हिय-उपवन में, लालसा के अंकुर फूटे, मंत्रमुग्ध हो, गौरैया सी चहचाने लगी, क्षितिज की शाख पर, क्रंदन करती, फुदकती, नवजीवन के सपने संजोती, सप्तरंगी सपनो में …