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प्रेम की लौ – डी. के. निवातिया

कोई कली जब फूल बनकर महक उठती है,उसे देख तबियत भंवरे कि चहक उठती है,महकने लगता है अहले चमन खुशबू से,सूने दिल मे भी प्रेम की लौ दहक उठती …