Tag: प्रकृति…

यह जीव -हत्या क्यों और कब तक ! (कविता )

यह बेजुबान जानवर,यह भोले जानवर ,इंसान की नियत से बेखबर ,यह मासूम जानवर .घर पर तो लाते हैं,बड़ा प्यार-दुलार देते हैं,लेकिन जब निकल जाये मतलब,तो सड़कों पर भटकने/मरने को …

वन महोत्सव

वन महोत्सवआओ मिलकर वृक्ष लगाएँ,मिलकर करें रखवालीपेड़ काटने वालों से पूछें हमबनकर एक सवाली।‘आज पेड़ जो काट रहे हो,क्या तुमने कभी ये सोचा?’‘कितने वृक्ष लगाए जीवन में?’,‘क्या तुमने खुद …

प्रकृति…

सुन्दर रूप इस धरा का, आँचल जिसका नीला आकाश, पर्वत जिसका ऊँचा मस्तक, उस पर चाँद सूरज की बिंदियों का ताज नदियों-झरनो से छलकता यौवन सतरंगी पुष्प-लताओं ने किया …