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मैं….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मैंऔरतुम थेमिले जबलम्हें हसीं थेहर रात हसीं थीहर सुबह रंगीन थीफिर ना जाने अमावसकैसे कहाँ से आ गयी किहम हम नहीं रहे तुम तुम नहींदूरियां यूं ही बढ़ती बढ़ती …