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नारी उत्थानं

नारी उत्थानं (राकेश कुमार )मैं नारी आतुर हूँहरदम तुझे बनाने कोहर पल तेरे साथ चलूँतुझे ऊपर उठाने कोतुम कमजोरी समझते होशर्म से पलकें झुकाने कोममता को मजबूरी समझाबहाना हाथ …