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नव पराग

तुम बिन सब गौण प्रिय लालसी इस धरा परकर रहे हैं क्रंदनतटस्थ भी मेरी व्यथा परदीप्त जलती और उजलीज्योति का अनुराग लेकर प्रफुटित हो रहे प्रसूननित् नव पराग लेकर …