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देश

1 कहने से कोई यूँ ही तलबगार नहीं होता शमशीर रखने से कोई पहरेदार नहीं होताफडकती हैं बाजुऐं जुनून सब जोश से बिना पसीना बहाऐ देश से प्यार नहीं …

मुक्तक ः उत्कर्ष

हम आज़ादी के दीवाने है, ……. इंकलाब ही नारा है…. उतनी नही हमे जां प्यारी, …….जितना देश प्यारा है… बुरी निगाहे डालो ना तुम, ……..भारत की प्राचीरों पे.. खौला …