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जग में तुझ सी माँ ना होगी

मैं चंचल मैं पापी भोगीजग  में तुझ सी माँ ना होगी ।दर्शन बिन रोती हैं अंखियापूरी कब अभिलाषा होगी ॥ मन्त्र न  जानूं , यन्त्र न जानूं,ध्यान न जानूं, तन्त्र …